समस्या ज्ञानेश कुमार नहीं, समस्या नरेंद्र मोदी और स्वयं सेवक संघ: पूर्व सीबीआई निदेशक

 समस्या ज्ञानेश कुमार नहीं, समस्या नरेंद्र मोदी और स्वयं सेवक संघ: पूर्व सीबीआई निदेशक







हिमांशु मिश्र, लखनऊ। सोमवार सीबीआई के पूर्व निदेशक ने केंद्र और राज्य सरकार को घेर लिया। उन्होंने बीजेपी की राजनीति पर जमकर निशाना साधा है। पूर्व सीबीआई ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर कर चल रहे प्रदर्शन को लेकर कहा है कि इस देश में समस्या ज्ञानेश कुमार नहीं है। देश में समस्या नरेंद्र मोदी है। देश के लिए समस्या आरएसएस है, जो अपनी ओछी राजनीति से महत्ववपूर्ण मुद्दों से लोगों को भटका रही है। उन्होंने कहा कि आज ज्ञानेश कुमार है कल कोई और कुमार आएगा। लेकिन उसका कंट्रोल बीजेपी और आरएसएस के हाथों में हो होगा।  




ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे पूर्व सीबीआई डायरेक्टर एम नागेश्वर राव ने राजनीति में एंट्री लेकर चौंका दिया हैं। उन्होंने सर्वजन सनातन पार्टी बनाई है। एक वक्त पर पश्चिम बंगाल और ओडिशा में चिटफंड घोटालों की जांच के लिए चर्चित रहे नागेश्वर राव को कई पुरस्कार मिल चुके हैं। वह सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच घमसान होने पर ज्वाइंट डायरेक्टर होते हुए सीबीआई के अंतरिम निदेशक बने थे। तब विवाद खत्म करने के लिए सरकार ने आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को फोर्स लीव पर भेजा था।


         


एम नागेश्वर राव मूल रूप से तेलंगाना के जयशंकर भूपालपल्ली जिले के रहने वाले हैं। राव ने 1981 में ओस्मानिया यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की थी। इसके अलावा वह आईआईटी मद्रास के भी छात्र रह चुके हैं। नागेश्वर राव 1986 में आईपीएस के लिए चुने गए। अपने सेवा कार्यकाल के दौरान वो अधिकतर समय छत्तीसगढ़ क्षेत्र में रहे. उन्होंने ओडिशा पुलिस में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक की ज़िम्मेदारी संभाली और बाद में चेन्नई क्षेत्र के सीबीआई के प्रमुख रहे। अब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी में सर्वजन सनातन पार्टी का ऐलान किया है। उन्होंने सनातन के मूल्यों पर राजनीति में कदम रखा है।




उन्होंने कहा कि हिंदू कोई बंधक वोट बैंक नहीं हैं। सनातन आकांक्षाओं को स्वतंत्र राजनीतिक आवाज़ मिलनी चाहिए। भारत को शासन का एक नया मॉडल चाहिए। सर्वजन सनातन पार्टी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष और सीबीआई के पूर्व निदेशक एम. नागेश्वर राव ने घोषणा की कि पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ेगी और मतदाताओं को एक स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प देगी।




वर्षों से भाजपा और आरएसएस से जुड़े सनातन तथा सभ्यतागत प्रश्नों पर सवाल उठाने वाले हिंदुओं से बार-बार पूछा जाता रहा है- "अगर हमें वोट नहीं देंगे, तो किसे देंगे? विकल्प क्या है?" इस तर्क के माध्यम से हिंदुओं को वास्तविक राजनीतिक विकल्प से वंचित करने का प्रयास किया जाता है। किसी भी राजनीतिक दल का हिंदू मतों पर एकाधिकार नहीं है। सभ्यतागत निष्ठा का अर्थ चुनावी दासता नहीं है। एसएसपी बंधक वोट बैंक की राजनीति को अस्वीकार करती है और सभ्यतागत पुनर्जागरण, सामाजिक समरसता, सार्वभौमिक जनकल्याण तथा जवाबदेह शासन के माध्यम से भारत के पुनर्निर्माण का लक्ष्य रखती है। यह लक्ष्य सनातन धर्म, संवैधानिक लोकतंत्र और प्रत्येक नागरिक की गरिमा पर आधारित है।




भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश की ऐतिहासिक और भौगोलिक जड़ें साझा हैं, लेकिन 1947 के विभाजन के बाद उनकी सभ्यतागत दिशाएँ अलग हो गई। पाकिस्तान और बांग्लादेश ने इस्लामी सभ्यतागत ढाँचा अपनाया, जबकि भारत की पहचान सनातन धर्म में निहित है। एसएसपी का मानना है कि भारत की शासन व्यवस्था ने इस सभ्यतागत पहचान की अभिव्यक्ति को लगातार कमजोर किया है। केवल शासन और न्यायिक सुधार इस गहरे क्षरण को नहीं रोक सकते; भारत को ऐसे सभ्यतागत पुनर्जागरण की आवश्यकता है, जो उसके शाश्वत सिद्धांतों और ज्ञान परंपराओं को आधुनिक शासन, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में स्थान दे।




राव ने संविधान के प्रति एसएसपी की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि पार्टी अपने उद्देश्यों को संवैधानिक, लोकतांत्रिक और वैधानिक तरीकों से आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी छद्म धर्मनिरपेक्षता और छद्म-हिंदुत्व–दोनों को अस्वीकार करती है। ऐसी राजनीति धार्मिक भावनाओं का दोहन करती है, जातिगत विभाजनों को गहरा करती है और सामाजिक दरारों को चुनावी हथियार बनाती है। पार्टी भारत की सभ्यतागत चेतना, संविधान के प्रति निष्ठा, सामाजिक सद्भाव और सबकी समृद्धि पर आधारित नई दिशा प्रस्तुत करती है। राव ने उत्तर प्रदेश में शासन की विफलताओं पर भी सवाल उठाए और इसे हिंदुओं द्वारा भाजपा पर जताए गए सभ्यतागत विश्वास के साथ विश्वासघात बताया।




उत्तर प्रदेश में अपराधियों से बड़ा गुंडा बनी सरकार 




राव ने कहा, "कानून-व्यवस्था का अर्थ कानून के माध्यम से व्यवस्था स्थापित करना है-बुलडोज़र या राज्य की दमनकारी ताकत के माध्यम से नहीं।" राज्य को सबसे पहले कानून का पालन करना चाहिए और नागरिकों के सामने उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। राज्य अपराधियों से बड़ा गुंडा नहीं बन सकता। यह कानून का शासन नहीं, बल्कि ताकत का शासन है। यदि सरकार का दावा है कि कानून-व्यवस्था सुधरी है और लोग सुरक्षित हैं, तो निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को व्यापक निजी सुरक्षा की आवश्यकता क्यों है? यह प्रश्न सरकार के दावों और ज़मीनी वास्तविकता, दोनों पर सवाल उठाता है। राज्य प्रत्येक विधायक, विधान परिषद सदस्य और सांसद को कम-से

-कम तीन पुलिस गनर


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